BSP नेता जावेद सिमनानी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने SSP गोरखपुर से की मुलाकात, FIR दर्ज न होने पर जताई नाराजगी

गोरखपुर जनपद के गगहा क्षेत्र में हुई निर्मम हत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) के पूर्व लोकसभा प्रत्याशी जावेद सिमनानी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) गोरखपुर से मुलाकात कर मृतक के भाई सरफराज अहमद के साथ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि घटना को 10 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।

जावेद सिमनानी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि पीड़ित परिवार जब स्थानीय थाने पर न्याय की गुहार लगाने जाता है तो उन्हें डराया-धमकाया जाता है, जिससे पुलिस प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के गृह जनपद में इस तरह की घटनाएं कानून व्यवस्था की बदहाली को दर्शाती हैं। “आज प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है और आम जनता को न्याय पाने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है,” उन्होंने कहा।

प्रतिनिधिमंडल ने एसएसपी गोरखपुर से मुलाकात के दौरान पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी और मांग की कि मृतक के भाई सरफराज अहमद की तहरीर पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। SSP ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि मामले में शीघ्र एफआईआर दर्ज कर विधिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी और पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाया जाएगा।

जावेद सिमनानी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो बहुजन समाज पार्टी का प्रतिनिधिमंडल उच्च अधिकारियों से मिलकर आंदोलन करेगा और न्याय की लड़ाई को और तेज करेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पार्टी पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और उनकी हर लड़ाई में सहयोग करने को तैयार है।

इस प्रतिनिधिमंडल में कई प्रमुख चेहरे शामिल रहे। इनमें योगेंद्र बौद्ध (पूर्व जिला पंचायत सदस्य), स्थानीय गांव के प्रधान अनिल कुमार पासवान, जेलर शाही उर्फ गुड्डू शाही, कलम शाही, एडवोकेट सतीश, मृतक के भाई सरफराज अहमद, नवल किशोर नाथहानी (पूर्व महापौर प्रत्याशी), ऋषि कपूर (पूर्व जिला अध्यक्ष), सुरेश भारती (पूर्व जिला अध्यक्ष), ओम नारायण पांडे, अनिल कुमार इंजीनियर और मयंक आजाद प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि बांसगांव की यह घटना केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

स्थानीय लोगों में भी इस मामले को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो जनता का भरोसा कानून व्यवस्था से उठ जाएगा। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि न्याय मिलने तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी और वे हर स्तर पर पीड़ित परिवार के साथ खड़े रहेंगे।

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