पीपीगंज में शत्रु संपत्ति और अतिक्रमण का मुद्दा गरमाया, सभासदों ने डीएम से जांच व कार्रवाई की मांग

पीपीगंज में शत्रु संपत्ति और अतिक्रमण को लेकर सभासदों का ज्ञापन, डीएम से जांच और कार्रवाई की मांग

उत्तर प्रदेश/ गोरखपुर नगर पंचायत पीपीगंज में कथित शत्रु संपत्ति और नगर के प्रमुख मार्गों पर बढ़ते अतिक्रमण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। नगर पंचायत के विभिन्न वार्डों से निर्वाचित सभासदों एवं उनके प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी गोरखपुर को संयुक्त ज्ञापन सौंपकर दोनों मामलों की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। सभासदों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो नगर के विकास कार्यों के साथ-साथ आमजन की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था भी प्रभावित होती रहेगी।

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ज्ञापन में सभासदों ने बताया कि नगर पंचायत पीपीगंज के मौजा साहबगंज स्थित आराजी संख्या-429, रकबा 405 हेक्टेयर सरकारी अभिलेखों में वली मोहम्मद पुत्र साहबजान के नाम दर्ज है। स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर प्रसारित सूचनाओं के अनुसार संबंधित व्यक्ति और उनका परिवार वर्षों पहले पाकिस्तान चला गया है तथा वर्तमान में उक्त भूमि पर कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से अवैध कब्जा किया गया है।

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सभासदों ने मांग की है कि प्रशासन इस पूरे प्रकरण की राजस्व अभिलेखों के आधार पर गहन जांच कराए। यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है कि संबंधित व्यक्ति पाकिस्तान चले गए हैं और भूमि शत्रु संपत्ति की श्रेणी में आती है, तो नियमानुसार उसे अवैध कब्जे से मुक्त कराकर शत्रु संपत्ति घोषित किया जाए। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में नगर पंचायत उस भूमि पर जनहित से जुड़े विकास कार्यों की योजना तैयार कर सकती है, जिससे स्थानीय नागरिकों को लाभ मिलेगा।

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इसके साथ ही सभासदों ने नगर के प्रमुख मार्गों पर बढ़ते अतिक्रमण का मुद्दा भी उठाया। ज्ञापन के अनुसार अतिक्रमण के कारण सड़कें लगातार संकरी होती जा रही हैं, जिससे आवागमन बाधित हो रहा है और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है। व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार और बढ़ते यातायात के बीच यह समस्या दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है।

ज्ञापन में विशेष रूप से दो प्रमुख मार्गों का उल्लेख किया गया है। पहला मार्ग शिव मंदिर से सुभाष इंटर कॉलेज तक का है, जिसकी सरकारी अभिलेखों में चौड़ाई 20 मीटर से अधिक दर्ज है। सभासदों का आरोप है कि अवैध कब्जों के चलते वर्तमान में यह सड़क केवल 4 से 5 मीटर तक सीमित रह गई है, जिससे वाहनों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

दूसरा मार्ग पुलिस चौकी से नई दुर्गा मंदिर तक का मुख्य बाजार मार्ग है। सभासदों के अनुसार यह सड़क पहले लगभग 25 मीटर चौड़ी थी, लेकिन अतिक्रमण के कारण अब इसकी प्रभावी चौड़ाई घटकर लगभग 10 मीटर रह गई है। बाजार क्षेत्र होने के कारण यहां प्रतिदिन भारी भीड़ रहती है, जिससे जाम और दुर्घटनाओं की स्थिति बनी रहती है।

सभासदों ने जिलाधिकारी से दोनों मार्गों की पैमाइश कराकर राजस्व अभिलेखों के अनुरूप सीमांकन कराने तथा अवैध अतिक्रमण हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे न केवल यातायात व्यवस्था सुचारु होगी बल्कि नगर के सौंदर्यीकरण और विकास कार्यों को भी गति मिलेगी।

नगरवासियों की नजर अब जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि प्रशासन जांच के बाद आवश्यक कदम उठाता है तो एक ओर कथित शत्रु संपत्ति का मामला स्पष्ट होगा, वहीं दूसरी ओर वर्षों से चली आ रही अतिक्रमण की समस्या के समाधान की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल हो सकती है।

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