साइकिल से माउंट एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचकर इतिहास रचने वाली दिव्या सिंह का गोरखपुर में भव्य स्वागत

उत्तर प्रदेश/ गोरखपुर की बेटी ने साइकिल से माउंट एवरेस्ट बेस कैंप (ऊंचाई 17,560 फीट) तक पहुंचकर नया इतिहास रच दिया है। दिव्या सिंह (28 वर्ष) भारत की पहली और विश्व की दूसरी महिला है जो साइकिल से माउंट एवरेस्ट बेस कैंप पर 24 मार्च 2026 को पहुंच कर कीर्तमान स्थापित किया है।

माउंट एवरेस्ट बेस कैंप पर पहुंचने वाली दिव्या सिंह मंगलवार को नेपाल से गोरखपुर लौटीं, जहां उनका जोरदार और भव्य स्वागत किया गया। जंगल कौड़िया क्षेत्र में आयोजित स्वागत समारोह में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, युवा और ग्रामीण मौजूद रहे, जिन्होंने फूल-मालाओं और तालियों के साथ उनका अभिनंदन किया।

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मूल रूप से दिव्या सिंह गोरखपुर जनपद के पिपरौली ब्लॉक के अमरौटा के बनौड़ा के रहने वाली है। दिव्या सिंह के पिता संतराज सिंह और माता उर्मिला सिंह है। दिव्या सिंह पेशे से शिक्षिका है। और इनको साइक्लिंग और ट्रैकिंग का शौक है।

दिव्या सिंह की इस अद्भुत उपलब्धि को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल देखने को मिला। कार्यक्रम के दौरान लोगों ने उन्हें सम्मानित करते हुए उनके साहस और दृढ़ संकल्प की सराहना की। इस अवसर पर परम ज्योति इंटर कॉलेज, रसूलपुर चकिया की वरिष्ठ अध्यापिका किरन सिंह ने दिव्या सिंह और उनके कोच उमा सिंह को डायरी और कलम भेंट कर सम्मानित किया।

कोच उमा सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि दिव्या सिंह 24 मार्च को माउंट एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचीं। उन्होंने बताया कि साइकिल से इस दुर्गम और चुनौतीपूर्ण स्थान तक पहुंचने वाली दिव्या सिंह भारत की पहली और विश्व की दूसरी महिला हैं। यह यात्रा शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद कठिन थी, जिसमें ऊंचाई, ठंड और खतरनाक रास्तों जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

मीडिया से बातचीत के दौरान दिव्या सिंह ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा, “अगर आपके भीतर कुछ बड़ा करने का जुनून है, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। जरूरी है कि आप अपने लक्ष्य को स्पष्ट रखें और उसे पाने के लिए निरंतर मेहनत करें।” उन्होंने यह भी कहा कि परिवार का सहयोग और आत्मविश्वास सफलता की कुंजी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि दिव्या सिंह की इस उपलब्धि ने न केवल गोरखपुर बल्कि पूरे देश की महिलाओं को नई दिशा और प्रेरणा दी है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों के लिए यह एक मिसाल है कि सीमित संसाधनों के बावजूद भी बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। दिव्या सिंह की यह ऐतिहासिक यात्रा आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देती है कि मजबूत इरादों और निरंतर प्रयास से किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है।

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