गोरखपुर के ग्रामीण इलाकों में अदा की गई ईद की नमाज, मांगी गई अमन-चैन और भाईचारे की दुआ

उत्तर प्रदेश/ गोरखपुर जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों रायपुर, तुर्कवलिया, नयागांव, जसवल, मंझरिया, बढ़या चौक और रमवापुर में ईद-उल-फितर का पर्व इस वर्ष पूरे उत्साह, सादगी और भाईचारे के साथ मनाया गया। सुबह से ही मस्जिदों में नमाज अदा करने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने एक साथ नमाज अदा कर देश में अमन-ओ-चैन, तरक्की और आपसी सौहार्द के लिए दुआ मांगी।

नमाज के बाद सभी लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी। छोटे-बड़े, अमीर-गरीब सभी ने मिलकर इस पवित्र त्योहार को सामाजिक एकता के प्रतीक के रूप में मनाया। गांवों में खास रौनक देखने को मिली और हर तरफ खुशियों का माहौल रहा।

इस खास मौके पर रायपुर के तीन वर्षीय मुहम्मद अमान चौधरी ने पहली बार ईद की नमाज अदा की, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। वहां मौजूद लोगों ने बच्चे को दुआएं दीं और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। यह पल सभी के लिए भावनात्मक और प्रेरणादायक रहा।

रायपुर के बिस्मिल्लाह अली, रमवापुर के मौलाना हाफिज अहमद, नयागांव के मुफ्ती मंजर आलम समेत पीपीगंज के रोशन अली का कहना है कि रमजान के पूरे एक महीने के रोजे रखने के बाद ईद का दिन अल्लाह की तरफ से एक खास इनाम होता है। उन्होंने कहा कि ईद केवल खुशियां मनाने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह जरूरतमंदों के साथ खुशियां साझा करने और समाज में प्रेम व भाईचारा बढ़ाने का संदेश देता है।

वहीं, प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद रहा, जिससे सभी स्थानों पर नमाज शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। कहीं से भी किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली।

नमाज के बाद मौलाना सैफूद्दीन ने लोगों को संबोधित करते हुए अल्लाह का शुक्र अदा किया और कहा कि सभी को एक-दूसरे के साथ मिल-जुलकर रहना चाहिए। उन्होंने आपसी भाईचारा बनाए रखने और समाज में शांति कायम रखने की अपील की।

इस अवसर पर अजमेर अली, जुबेर अली, साहिल अली, इंसाफ अली, मोहम्मद इब्राहिम अली, जाहिद अली, असगर अली, अहमद रजा, अशफाक अहमद, शाबीर अली, शमशाद अली, हारून कादरी, शरीफ अली, निजामुद्दीन, जुबेर अशरफी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

गोरखपुर के इन ग्रामीण इलाकों में मनाया गया ईद-उल-फितर का पर्व गंगा-जमुनी तहजीब, सामाजिक एकता और भाईचारे की मिसाल बनकर सामने आया, जिसने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि त्योहार लोगों को जोड़ने का काम करते हैं।

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