गोरखपुर में मानीराम इंडेन सर्विस गैस एजेंसी पर कालाबाजारी के आरोप, सीसीटीवी फुटेज वायरल, जांच की मांग तेज

गोरखपुर के मानीराम इंडेन सर्विस गैस एजेंसी पर कालाबाजारी के गंभीर आरोप। शेरपुर टोल प्लाजा के पास संदिग्ध गतिविधियों का CCTV वीडियो वायरल, उपभोक्ताओं ने की सख्त कार्रवाई की मांग।

उत्तर प्रदेश/ गोरखपुर में इन दिनों रसोई गैस सिलेंडरों की कमी के बीच मानीराम इंडेन सर्विस गैस एजेंसी पर कालाबाजारी के गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय उपभोक्ताओं ने एजेंसी से जुड़े कुछ लोगों पर अवैध तरीके से सिलेंडर बेचने का आरोप लगाया है, जिससे आम जनता में भारी आक्रोश है।

स्थानीय लोगों का दावा है कि एजेंसी से जुड़ी एक महिला, जो खुद को मालिक बताती है, और उसके साथ एक युवक मिलकर खाली सिलेंडरों को रिफिल कराकर सुनसान स्थानों पर ऊंचे दामों में बेच रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि यह काम लंबे समय से चल रहा है, लेकिन अब जाकर इसका खुलासा हुआ है।

ग्रामीणों के अनुसार, एजेंसी के गोदाम में संदिग्ध गतिविधियां लगातार देखी जा रही थीं। खासकर मेहदरिया गांव स्थित गोदाम में पिछले एक सप्ताह से यह महिला नियमित रूप से आ रही थी और हर बार अपने साथ एक युवक को भी लाती थी।

घटना 18 मार्च की बताई जा रही है, जब स्थानीय लोगों को एक सिलेंडर से लदे ट्रक पर शक हुआ। उन्होंने ट्रक का पीछा किया, जो शेरपुर चमराह टोल प्लाजा के पास जाकर रुका। आरोप है कि यहां खाली सिलेंडरों की जगह भरे हुए सिलेंडर ट्रकों में रखवाए गए और फिर दूसरी गाड़ी में ट्रांसफर कर दिए गए।

शेरपुर चमराह टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज में यह पूरी गतिविधि कैद होने का दावा किया जा रहा है। फुटेज में महज दो-दो मिनट के अंतराल पर एक ट्रक, एजेंसी के दो कर्मचारी मोटरसाइकिल पर, महिला की कार और एक अर्टिगा गाड़ी टोल से गुजरती दिखाई दे रही है।

इस पूरे मामले का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक के बाद एक कई वाहन टोल प्लाजा से गुजरते दिखाई देते हैं, जिससे कालाबाजारी के आरोपों को और बल मिल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अर्टिगा गाड़ी में सिलेंडर भरकर अवैध तरीके से बेचे जा रहे हैं। समर एक्सप्रेस इस वायरल वीडियो कि पुष्टि नहीं करता है।

शनिवार को जब स्थानीय नागरिकों ने एजेंसी से जुड़े जिम्मेदारों से सवाल किया कि कितने सिलेंडर आए और कितने वितरित किए गए, तो उन्होंने जवाब देने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था कि इस संबंध में जानकारी केवल जिला पूर्ति अधिकारी ही दे सकते हैं।

मौके पर आपूर्ति विभाग का कोई भी अधिकारी मौजूद नहीं था, जिससे उपभोक्ताओं का संदेह और गहरा गया। लोगों का आरोप है कि यदि सब कुछ सही होता तो जानकारी देने में कोई हिचकिचाहट नहीं होती।

स्थानीय ग्रामीणों ने राम हरक, महेश, सुरेश और उत्तम ने खुलकर आरोप लगाया है कि एजेंसी से जुड़े यही लोग इस पूरे कालाबाजारी नेटवर्क को चला रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

उपभोक्ताओं ने जिला प्रशासन से अपील की है कि गैस एजेंसी पर रोजाना निगरानी रखी जाए और मौके पर अधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। साथ ही, एजेंसी में संदिग्ध लोगों की जगह अधिकृत मालिक या सरकारी प्रतिनिधि को बैठाने की मांग की गई है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पूरे देश में रसोई गैस सिलेंडरों की कमी की शिकायतें मिल रही हैं। भारत के कई हिस्सों में गैस एजेंसियों पर कालाबाजारी के आरोप लग चुके हैं और प्रशासन द्वारा कार्रवाई भी की गई है।

गोरखपुर में भी हाल के दिनों में कई एजेंसियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि समस्या व्यापक हो सकती है।

गोरखपुर में मानीराम इंडेन सर्विस गैस एजेंसी पर लगे कालाबाजारी के आरोपों ने प्रशासन और उपभोक्ताओं के बीच विश्वास का संकट खड़ा कर दिया है। वायरल सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय लोगों के आरोपों ने मामले को गंभीर बना दिया है। जबकि मानीराम इंडेन सर्विस गैस एजेंसी के प्रोपराइटर का कहना है सभी आरोप निराधार है। यहां पर नियम पूर्वक एलपीजी गैस का वितरण हो रहा है।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और निष्पक्षता से जांच करता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है। फिलहाल, आम जनता को राहत और पारदर्शिता की सख्त जरूरत है।

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