उत्तर प्रदेश/ गोरखपुर मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित मां समय का मंदिर अपनी धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक रहस्यों के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर परिसर में स्थित अद्भुत आठ कोण वाला प्राचीन कुआं श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

यह स्थल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपने अनोखे स्थापत्य और प्राचीन इतिहास के कारण भी चर्चा में रहता है। दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु यहां मां समय के दरबार में अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं और सच्चे मन से प्रार्थना करते हैं।

मां समय मंदिर में पूरे वर्ष पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान होते रहते हैं। यहां विशेष रूप से झाड़-फूंक और पारंपरिक पूजा पद्धतियों का आयोजन किया जाता है, जिससे लोगों की आस्था और भी गहरी होती है। स्थानीय मान्यता है कि यहां मां के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद जरूर पूरी होती है।
चैत्र पूर्णिमा के अवसर पर इस मंदिर में विशेष आयोजन होता है। इस दिन स्थानीय लोग “कढ़ाई” की परंपरा निभाते हैं, जिसमें नए गेहूं से बनी पूड़ियां मां के चरणों में अर्पित की जाती हैं। श्रद्धालु इस प्रसाद को चढ़ाकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल कामना करते हैं।
चैत्र पूर्णिमा के दिन यहां विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें आसपास के गांवों के अलावा दूरदराज के क्षेत्रों से भी भारी संख्या में लोग शामिल होते हैं। मेले में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ सामाजिक मेलजोल का भी विशेष महत्व होता है।
मंदिर परिसर में स्थित आठ कोण वाला प्राचीन कुआं इस स्थान की सबसे खास पहचान है। इसकी बनावट अन्य कुओं से बिल्कुल अलग है, जो इसे अद्वितीय बनाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह कुआं प्राचीन काल में थारू राजा के महल का हिस्सा था।
मान्यता है कि उस समय राजा की आठ रानियां थीं, और सभी के लिए इस कुएं में अलग-अलग कोण बनाए गए थे, जिससे हर रानी के लिए पानी की अलग व्यवस्था हो सके। आज भी यह कुआं उसी स्वरूप में मौजूद है और लोगों को अपने इतिहास की याद दिलाता है।
मंदिर के आसपास खुदाई के दौरान प्राचीन मिट्टी के बर्तनों के अवशेष भी मिलते हैं, जो इस स्थान की ऐतिहासिकता को प्रमाणित करते हैं। यह संकेत देता है कि यहां कभी किसी विकसित सभ्यता या राजसी निवास का अस्तित्व रहा होगा।
मां समय मंदिर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद के नवनिर्मित भरोहिया ब्लॉक के दक्षिण में स्थित ग्राम सभा बारहपाटी के थवईपार और नारायणपुर गांवों के पास स्थित है। ग्रामीण परिवेश में बसा यह स्थल प्राकृतिक सुंदरता और शांति का भी अनुभव कराता है।
गांव के कई प्रमुख ग्रामीण जैसे रामदास सिंह, जितेंद्र यादव, दीनबंधु सिंह, कुशहर सिंह, रामचंद्र गौड़, बबलू शर्मा, प्रमोद कुमार, रामदरश प्रजापति, भगवानदास सिंह, बैजनाथ गौंड, रामकमल सिंह, बलिराम सिंह, देवीशरण सिंह, रिंकू सिंह, जयप्रकाश सिंह, जीतेन्द्र सिंह, श्रीप्रकाश पांडेय, मदन यादव, श्यामनारायण और विनोद कुमार सहित अन्य लोगों ने बताया कि यह मंदिर हम सब गांव वालों के आस्था का प्रतीक है और यहां की मान्यताओं पर उनका अटूट विश्वास है।
मां समय मंदिर और यहां स्थित आठ कोण वाला प्राचीन कुआं आस्था, इतिहास और रहस्य का अनोखा संगम है। यह स्थल न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि अपने अद्वितीय स्थापत्य और पुरातात्विक संकेतों के कारण भी बेहद खास है।
