गोरखपुर डूडा विभाग में करोड़ों के टेंडर पर उठे सवाल, आउटसोर्सिंग कर्मी पर भाई की फर्म को लाभ पहुंचाने का आरोप

गोरखपुर/ मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर में स्थित जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) विभाग में करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों के टेंडर को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि विभाग में कार्यरत एक आउटसोर्सिंग कर्मचारी ने अपने भाई की फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए कथित तौर पर गलत दस्तावेजों का इस्तेमाल कर लगभग “पांच करोड़ रुपये के निर्माण कार्यों का ठेका हासिल करा दिया।” इस मामले के सामने आने के बाद विभागीय कार्यप्रणाली और टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, डूडा विभाग द्वारा करीब एक माह पूर्व विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए करोड़ों रुपये की लागत वाले टेंडर आमंत्रित किए गए थे। इन टेंडरों में कई फर्मों ने भाग लिया था। बताया जा रहा है कि दो दिन पूर्व टेंडर प्रक्रिया के तहत प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों और दरों को खोला गया, जिसके दौरान कथित अनियमितताओं की चर्चा शुरू हुई।

आरोप है कि डूडा विभाग में आउटसोर्सिंग के माध्यम से यूएलएमसीएओ (ULMCAO) पद पर कार्यरत अनिल खरवार ने अपने भाई के नाम से संचालित “दृशिका कंस्ट्रक्शन कंपनी” के पक्ष में प्रभाव का इस्तेमाल किया। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि संबंधित निर्माण कार्यों के लिए निर्धारित पात्रता शर्तों में तीन वर्ष के कार्यानुभव की आवश्यकता थी, जबकि संबंधित फर्म द्वारा मात्र एक वर्ष के अनुभव संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। इसके बावजूद फर्म को लगभग पांच करोड़ रुपये के निर्माण कार्यों का ठेका दिए जाने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई।

यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला सरकारी टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि विभागीय कर्मचारी के परिजनों की फर्म को कथित रूप से लाभ पहुंचाने के लिए नियमों की अनदेखी की गई।

मामले को लेकर अन्य प्रतिभागियों में भी असंतोष देखा जा रहा है। उनका कहना है कि यदि पात्रता संबंधी मानकों का समान रूप से पालन नहीं किया गया तो निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रभावित होगी और योग्य फर्मों के साथ अन्याय होगा। उन्होंने पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है।

इस संबंध में जब डूडा विभाग के परियोजना अधिकारी सुदीप कुमार तिवारी से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस प्रकार की किसी अनियमितता की जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि “यदि इस मामले में कोई औपचारिक आपत्ति या शिकायत दर्ज कराई जाती है तो नियमानुसार उसकी जांच कराते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”

फिलहाल, इस पूरे मामले में किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा आधिकारिक जांच शुरू किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, आरोपों की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभाग से निष्पक्ष जांच और तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग तेज हो गई है। मुख्यमंत्री के गृह जनपद से जुड़ा होने के कारण यह मामला प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

यदि शिकायतकर्ता संबंधित दस्तावेजों के साथ औपचारिक आपत्ति दर्ज कराते हैं, तो जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि टेंडर प्रक्रिया में वास्तव में नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं। फिलहाल, यह मामला आरोप और प्रत्यारोप के स्तर पर है, जिसकी सत्यता सक्षम जांच के बाद ही स्थापित हो पाएगी।

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