पीपीगंज के बापू इंटर कालेज पीपीगंज पर छात्रा को पढ़ाई से वंचित करने का आरोप, अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद दोबारा मिला प्रवेश

गोरखपुर/ गोरखपुर जनपद के नगर पंचायत पीपीगंज स्थित एक प्रतिष्ठित विद्यालय पर छात्रा को पढ़ाई से वंचित करने का गंभीर आरोप सामने आया है। मामला उस समय तूल पकड़ गया जब छेड़खानी की घटना की शिकायत करने वाली छात्रा को कथित रूप से विद्यालय आने से रोक दिया गया। परिजनों द्वारा जिला प्रशासन से शिकायत किए जाने के बाद कैंपियरगंज के क्षेत्राधिकारी (सीओ) अनुराग सिंह और उपजिलाधिकारी (एसडीएम) आलोक रंजन विद्यालय पहुंचे तथा पूरे मामले की जांच-पड़ताल की। अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद छात्रा को पुनः विद्यालय में पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दे दी गई।

जानकारी के अनुसार पीपीगंज थाना क्षेत्र की रहने वाली एक छात्रा बापू इंटर कालेज पीपीगंज में कक्षा नौवीं में अध्ययनरत है। कुछ दिनों पूर्व छात्रा के साथ कथित छेड़खानी की घटना हुई थी। इस संबंध में छात्रा ने स्थानीय थाने में लिखित तहरीर देकर आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपितों में से एक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जबकि दूसरे आरोपी के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर परिजनों ने नाराजगी जताई है।

परिजनों का आरोप है कि घटना की जानकारी मिलने के बाद विद्यालय प्रशासन ने यह कहते हुए छात्रा को विद्यालय आने से रोक दिया कि जब तक मामला न्यायालय में विचाराधीन रहेगा, तब तक छात्रा विद्यालय में उपस्थित नहीं होगी। इस कथित निर्णय से छात्रा की पढ़ाई प्रभावित होने लगी, जिसके बाद परिवार ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की।

शिकायत मिलने पर क्षेत्राधिकारी कैंपियरगंज अनुराग सिंह और उपजिलाधिकारी आलोक रंजन विद्यालय पहुंचे। अधिकारियों ने विद्यालय प्रशासन, छात्रा और उसके परिजनों से अलग-अलग बातचीत कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। पूछताछ के बाद अधिकारियों ने छात्रा की शिक्षा बाधित न होने देने पर जोर दिया और उसे नियमित रूप से विद्यालय में पढ़ाई करने के निर्देश दिए।

पीड़ित छात्रा ने अधिकारियों की मौजूदगी में कहा कि अब उसे उम्मीद है कि उसकी पढ़ाई नहीं रुकेगी। छात्रा ने कहा, “सर लोगों के आने से अब मेरी पढ़ाई नहीं रुकेगी।” छात्रा के इस बयान से यह स्पष्ट हुआ कि प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद उसे राहत मिली है।
इस संबंध में विद्यालय प्रशासन का कहना है कि छात्रा के सुरक्षा दृष्टि को देखते हुए उसे घर रहने के लिए कहा गया था। उसे विद्यालय में आने से मना नहीं किया गया है।

वहीं छात्रा के माता-पिता ने विद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि विद्यालय प्रशासन छेड़खानी के आरोपियों के पक्ष में सुलह-समझौते का दबाव बनाने का प्रयास कर रहा था। परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने समझौता करने से इनकार कर दिया, तब उनकी बेटी को विद्यालय से बाहर करने की कोशिश की गई।

पीड़िता के माता-पिता ने स्थानीय पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मामले में दो आरोपित नामजद थे, लेकिन पुलिस ने केवल एक आरोपी को ही जेल भेजा है। उनका आरोप है कि दूसरा आरोपी प्रभावशाली और दबंग प्रवृत्ति का है, जिसके विरुद्ध अब तक कठोर कार्रवाई नहीं की गई। परिजनों का यह भी कहना है कि दूसरा आरोपी लगातार सुलह-समझौते का दबाव बना रहा है, जिससे परिवार भय और मानसिक तनाव में है।

फिलहाल प्रशासनिक अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद छात्रा की पढ़ाई दोबारा शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। वहीं विद्यालय प्रशासन और पुलिस पर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच तथा शेष आरोपी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग लगातार उठ रही है। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है और लोग प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं।

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