उत्तर प्रदेश/ गोरखपुर जनपद के विकास खंड भरोहिया के ग्राम पंचायत रामपुर कैथवलिया में VBG RAM G (पूर्व मनरेगा) के तहत कराए जा रहे विकास कार्यों में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी अभिलेखों में नियमित रूप से मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की जा रही है, जबकि कार्यस्थल पर वास्तविकता कुछ और ही दिखाई दे रही है। मौके पर निरीक्षण के दौरान कार्यस्थल पर कोई भी मजदूर कार्य करता नहीं मिला, जबकि मास्टर रोल में बड़ी संख्या में श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज होने की बात कही जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत में चल रहे विकास कार्यों में नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। आरोप है कि ग्राम प्रशासक और सचिव की मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकार की महत्वाकांक्षी रोजगार योजना की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
बताया जा रहा है कि ग्राम पंचायत के गंगापार क्षेत्र स्थित पोखरे का सुंदरीकरण कार्य VBG RAM G के तहत कराया जा रहा है। लेकिन कार्यस्थल पर मजदूरों की मौजूदगी नहीं मिली। इसके विपरीत वहां ट्रैक्टर के स्पष्ट निशान दिखाई दिए, जिससे ग्रामीणों ने मशीनों के इस्तेमाल की आशंका जताई है। मनरेगा के नियमों के अनुसार इस प्रकार के कार्यों में मशीनों का उपयोग प्रतिबंधित है और अधिकांश कार्य केवल पंजीकृत मजदूरों से ही कराया जाना चाहिए, ताकि ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध हो सके।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें इस कार्य की जानकारी तक नहीं है। उनका आरोप है कि जिन लोगों के नाम पर मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है, उनमें से कई लोग कार्यस्थल पर पहुंचे ही नहीं। ऐसे में मास्टर रोल में दर्ज उपस्थिति और वास्तविक कार्य के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। यदि इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए तो पूरे मामले का खुलासा हो सकता है।
गौरतलब है कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित यह रोजगार योजना ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाई जाती है। इस योजना के तहत अब पात्र परिवारों को 125 दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण मजदूरों का पलायन रोकना और उन्हें गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराना है।
हालांकि, रामपुर कैथवलिया में सामने आए इन आरोपों ने योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, मास्टर रोल की जांच, कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।
(नोट: यह समाचार स्थानीय स्तर पर लगाए गए आरोपों और मौके पर किए गए अवलोकन पर आधारित है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
