जंगल कौड़िया में स्थानांतरण के बाद लाखों का भुगतान, वित्तीय अनियमितता की जांच शुरू; बीडीओ ने दो अधिकारियों को जारी किया कारण बताओ नोटिस

उत्तर प्रदेश/ गोरखपुर जनपद के विकास खंड जंगल कौड़िया की ग्राम पंचायत पचवारा खास और डिहाघाट में स्थानांतरण के बाद किए गए लाखों रुपये के भुगतान को लेकर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। शिकायत मिलने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) सुरेश चंद्र श्रीवास्तव ने मामले को गंभीर मानते हुए सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) तथा तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है।

Oplus_131072

जानकारी के अनुसार, एक ग्राम पंचायत सचिव ने बीडीओ को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि 16 जुलाई तक उन्हें संबंधित ग्राम पंचायतों का विधिवत कार्यभार नहीं सौंपा गया था। इसके बावजूद स्थानांतरण आदेश प्रभावी होने के बाद ग्राम पंचायत डिहाघाट में लगभग 2 लाख 98 हजार रुपये तथा ग्राम पंचायत पचवारा खास में करीब 1 लाख 15 हजार रुपये का भुगतान कर दिया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह भुगतान निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किए बिना किया गया, जिससे वित्तीय पारदर्शिता और सरकारी नियमों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

शिकायत प्राप्त होने के बाद बीडीओ सुरेश चंद्र श्रीवास्तव ने तत्काल मामले का संज्ञान लिया। उन्होंने सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) और तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी अंकुर दुबे को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 24 घंटे के भीतर विस्तृत लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित समयावधि में जवाब प्राप्त नहीं होता अथवा दिया गया स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर एकपक्षीय रूप से उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए उच्चाधिकारियों को कार्रवाई के लिए संस्तुति भेजी जाएगी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए बीडीओ ने संबंधित भुगतानों से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों को तत्काल सुरक्षित रखने के निर्देश भी जारी किए हैं। इनमें ई-एफटीओ (e-FTO), भुगतान विवरण, एमआईएस रिपोर्ट, डोंगल लॉग, डिजिटल प्रमाणीकरण रिकॉर्ड तथा अन्य संबंधित अभिलेख शामिल हैं। अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि किसी भी दस्तावेज में किसी प्रकार का संशोधन, विलोपन अथवा परिवर्तन न किया जाए। यदि जांच के दौरान अभिलेखों से छेड़छाड़ की पुष्टि होती है तो इसे गंभीर प्रशासनिक और कानूनी उल्लंघन माना जाएगा।

खंड विकास अधिकारी सुरेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि वित्तीय अनियमितता की शिकायत मिलने के बाद जांच समिति गठित कर दी गई है। समिति पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करेगी और संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण करेगी। उन्होंने बताया कि इस मामले की सूचना जिला पंचायत राज अधिकारी, गोरखपुर को भी पत्र के माध्यम से भेज दी गई है ताकि आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई समय पर सुनिश्चित की जा सके।

बीडीओ ने कहा कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि स्थानांतरण आदेश प्रभावी होने के बाद सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना भुगतान किया गया या वित्तीय नियंत्रण एवं शासन द्वारा निर्धारित प्रक्रियाओं का उल्लंघन हुआ है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की भी संस्तुति की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी धन के उपयोग में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यह मामला ग्राम पंचायतों में वित्तीय अनुशासन, स्थानांतरण के बाद कार्यभार हस्तांतरण की प्रक्रिया तथा सरकारी धन के भुगतान की पारदर्शिता को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था की जवाबदेही और वित्तीय नियंत्रण प्रणाली की प्रभावशीलता पर भी प्रभाव डाल सकता है।

फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और प्रशासन की ओर से संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भुगतान किन परिस्थितियों में किया गया, क्या निर्धारित नियमों का पालन हुआ अथवा नहीं, और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाएगी। इस प्रकरण पर स्थानीय लोगों की भी नजर बनी हुई है, क्योंकि सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी मानी जाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!