गोरखपुर/ महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), गोरखपुर में अंतर्राष्ट्रीय आलू केंद्र (सीआईपी) – दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (CSARC) के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह एवं वैज्ञानिक डॉ. अजय पुंडीर ने कृषि विज्ञान केंद्र का भ्रमण कर विभिन्न कृषि अनुसंधान गतिविधियों का अवलोकन किया। इस दौरान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. आर. के. सिंह ने उन्हें केंद्र के कृषि फार्म में संचालित धान की सीधी बुवाई (Direct Seeded Rice-DSR) के प्रक्षेत्र का निरीक्षण कराया।

भ्रमण के दौरान विशेषज्ञों ने धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) और पारंपरिक रोपाई विधि के बीच तुलनात्मक अध्ययन पर विस्तार से चर्चा की। वैज्ञानिकों ने इस तकनीक के माध्यम से किसानों को होने वाले संभावित लाभ, लागत में कमी, जल संरक्षण तथा समय की बचत जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार-विमर्श किया।
इस अवसर पर केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. आर. के. सिंह ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र में “फसल स्थापना के माध्यम से धान-गेहूं प्रणाली का अनुकूलन” विषय पर प्रक्षेत्र परीक्षण संचालित किया जा रहा है। इस अनुसंधान का मुख्य उद्देश्य यह आकलन करना है कि सीधी बुवाई से तैयार धान की फसल का अगली गेहूं की फसल के उत्पादन तथा संपूर्ण धान-गेहूं प्रणाली की उत्पादकता पर क्या प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य और कृषि लागत में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए धान की सीधी बुवाई तकनीक किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है। यह तकनीक सिंचाई के पानी की बचत करने के साथ-साथ श्रम लागत को भी कम करती है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।
निरीक्षण के दौरान सीआईपी-सीएसएआरसी के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह ने केंद्र में किए जा रहे अनुसंधान कार्यों की सराहना की। उन्होंने सुझाव दिया कि धान की सीधी बुवाई एवं इससे जुड़े शोध परिणामों को बुलेटिन के रूप में तैयार कर किसानों के बीच व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसान आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ उठा सकें।
डॉ. सुधांशु सिंह ने कहा कि कृषि अनुसंधान तभी सफल माना जाएगा जब उसका लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे। उन्होंने वैज्ञानिकों से अनुसंधान आधारित जानकारी को सरल भाषा में तैयार कर किसानों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया।
इस अवसर पर केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डॉ. संदीप प्रकाश उपाध्याय, जितेंद्र सिंह, यंग प्रोफेशनल डॉ. सुमित सिंह सहित कृषि विज्ञान केंद्र के समस्त वैज्ञानिक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने धान की आधुनिक खेती, संसाधन संरक्षण और टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए चल रहे अनुसंधानों पर विस्तार से चर्चा की।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) जैसी आधुनिक तकनीकें भविष्य की कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होंगी। इससे न केवल पानी और श्रम की बचत होगी, बल्कि उत्पादन लागत घटाकर किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किए जा रहे ऐसे अनुसंधान पूर्वांचल के किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं।
