उपकार विशेषज्ञ टीम ने किया महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र का निरीक्षण, किसानों की जरूरतों के अनुरूप टिकाऊ कृषि मॉडल पर दिया जोर

गोरखपुर/ उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) की विशेषज्ञ टीम ने शनिवार को महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र, चौकमाफी, गोरखपुर में संचालित वित्तपोषित इंटरवेंशन परियोजना का व्यापक मूल्यांकन एवं अनुश्रवण किया। विशेषज्ञों ने परियोजना की प्रगति, किसानों की सहभागिता, तकनीकी हस्तांतरण तथा संसाधनों के प्रभावी उपयोग का गहन निरीक्षण करते हुए भविष्य की कार्ययोजना के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। इस दौरान किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप टिकाऊ एवं व्यावहारिक कृषि मॉडल विकसित करने पर विशेष बल दिया गया।

निरीक्षण दल का नेतृत्व प्रो. डी. राम (पूर्व प्राध्यापक, आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या) ने किया। टीम में उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार), लखनऊ के वैज्ञानिक अधिकारी प्रेमचंद चौरसिया तथा गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर (उत्तराखंड) के वैज्ञानिक डॉ. एस. के. श्रीवास्तव, डॉ. वी. के. राव एवं डॉ. अजय कुमार शामिल रहे।

कार्यक्रम के दौरान परियोजना के नोडल अधिकारी एवं महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र, सिद्धार्थनगर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. आर. के. सिंह ने इंटरवेंशन परियोजना की रूपरेखा, उद्देश्यों, उपलब्धियों तथा किसानों को मिल रहे लाभों की विस्तृत जानकारी विशेषज्ञ दल के समक्ष प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि परियोजना के माध्यम से आधुनिक कृषि तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने और उनकी आय बढ़ाने के लिए विभिन्न नवाचार किए जा रहे हैं।

विशेषज्ञ टीम ने कृषि विज्ञान केंद्र में संचालित फील्ड गतिविधियों का निरीक्षण किया और तकनीकी हस्तांतरण की वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन किया। इसके बाद टीम ने विकासखंड चरगांवा के ग्राम रामपुर गोपालपुर, सियारामपुर एवं महराजगंज में किसानों के प्रक्षेत्रों का भ्रमण किया। यहां किसानों से सीधा संवाद स्थापित कर परियोजना से प्राप्त लाभ, खेती में आ रही चुनौतियों तथा भविष्य की अपेक्षाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की गई।

किसानों ने विशेषज्ञों के समक्ष आधुनिक तकनीकों के उपयोग, उत्पादन में वृद्धि तथा कृषि लागत कम होने जैसे सकारात्मक अनुभव साझा किए। वहीं कुछ किसानों ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता भी बताई।

विशेषज्ञ दल ने कहा कि कृषि विकास की योजनाएं तभी सफल होंगी जब उन्हें किसानों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जाएगा। उन्होंने परियोजना को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई सुधारात्मक सुझाव दिए तथा वैज्ञानिकों से नवाचार आधारित टिकाऊ कृषि मॉडल विकसित करने पर विशेष ध्यान देने की अपील की।

इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. विवेक प्रताप सिंह, उद्यान वैज्ञानिक डॉ. अजीत कुमार श्रीवास्तव, मृदा वैज्ञानिक डॉ. संदीप प्रकाश उपाध्याय, सस्य वैज्ञानिक डॉ. अवनीश कुमार सिंह, डॉ. श्वेता सिंह, आशीष सिंह, गौरव सिंह, जितेंद्र सिंह, परियोजना के यंग प्रोफेशनल अतुल यादव, डॉ. सुमित सिंह सहित परियोजना से जुड़े चार दर्जन से अधिक कृषक उपस्थित रहे। विशेषज्ञ टीम के भ्रमण को कृषि अनुसंधान एवं तकनीकी हस्तांतरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे क्षेत्र के किसानों को भविष्य में और अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!