धान की नर्सरी डालने से पहले बरतें ये सावधानियाँ, 15% तक बढ़ सकती है पैदावार

गोरखपुर/ महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को धान की नर्सरी तैयार करने से पहले जरूरी सावधानियाँ अपनाने की सलाह दी है। वैज्ञानिकों के अनुसार यदि किसान सही तरीके से नर्सरी तैयार करें तो बीज, पानी और समय की बचत के साथ-साथ धान की पैदावार में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है।

कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ राजेश कुमार सिंह ने बताया कि धान की नर्सरी किसानों के लिए बेहद फायदेमंद होती है। सीधी बुआई की तुलना में नर्सरी पद्धति में लगभग चार गुना कम बीज की आवश्यकता पड़ती है। इसके अलावा नर्सरी में पौधे स्वस्थ और मजबूत तैयार होते हैं, जिससे खेत में रोपाई के बाद फसल का विकास बेहतर होता है और उत्पादन में वृद्धि होती है।

उन्होंने कहा कि छोटी जगह में तैयार की गई नर्सरी में खरपतवार और बीमारियों का नियंत्रण करना आसान रहता है। इससे दवाइयों पर होने वाला अतिरिक्त खर्च कम होता है। साथ ही इस विधि से किसानों को 20 से 25 दिन तक का समय बचाने के साथ पानी की भी बचत होती है। उन्होंने किसानों को संदेश देते हुए कहा कि “अच्छी नर्सरी, आधी खेती” यानी मजबूत नर्सरी ही बंपर उत्पादन की पहली सीढ़ी होती है।

केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डॉ संदीप प्रकाश उपाध्याय ने नर्सरी बेड के सही आकार के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि 10 किलो धान के बीज के लिए 5 कदम चौड़ा और 8 कदम लंबा बेड बनाना चाहिए। वहीं 15 किलो बीज के लिए 5 कदम × 11 कदम, 20 किलो बीज के लिए 6 कदम × 12 कदम तथा 25 किलो बीज के लिए 6 कदम × 15 कदम का बेड उपयुक्त माना जाता है। उन्होंने बताया कि 1 किलो धान के बीज के लिए लगभग 64 वर्ग कदम जगह आवश्यक होती है। सही आकार की नर्सरी तैयार करने से पौधों का विकास बेहतर होता है और फसल की गुणवत्ता भी बढ़ती है।

शस्य विज्ञान वैज्ञानिक डॉ अवनीश सिंह ने बताया कि धान की नर्सरी डालने से पहले बीज को 8 से 10 घंटे तक पानी में भिगोना चाहिए। इसके बाद बीज को 18 से 20 घंटे तक जूट के बोरे में ढककर रखना जरूरी है ताकि बीज अच्छी तरह अंकुरित हो सके। अंकुरण पूरा होने के बाद ही बीज को नर्सरी में डालना चाहिए।

उन्होंने किसानों को सलाह दी कि नर्सरी में पानी और खाद का प्रयोग हमेशा शाम के समय करें। शुरुआती 8 से 10 दिनों तक सुबह के समय खेत में पानी जमा नहीं होना चाहिए। साथ ही क्यारी में पानी निकासी की उचित व्यवस्था रखना बेहद जरूरी है। इन सावधानियों का पालन करने से नर्सरी स्वस्थ रहती है और पौधों में रोग लगने की संभावना कम हो जाती है।

वैज्ञानिकों ने कहा कि धान की नर्सरी किसानों के लिए एक तरह का सुरक्षा कवच है। इससे बीज, पानी और समय तीनों की बचत होती है, जबकि स्वस्थ पौध तैयार होने से खेती की लागत घटती है और उत्पादन में बढ़ोतरी होती है। किसानों को आधुनिक तकनीकों के साथ वैज्ञानिक सलाह अपनाकर खेती करने की आवश्यकता है ताकि कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त किया जा सके।

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