गोरखपुर में युवक के अपहरण और मारपीट का आरोप, पुलिस ने बताया प्रेम प्रसंग का मामला, आरोपी युवक भेजा गया जेल

उत्तर प्रदेश/ गोरखपुर जनपद के पीपीगंज थाना क्षेत्र में एक युवक के कथित अपहरण और बेरहमी से मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित युवक की मां ने गांव के कई लोगों पर पुत्र को जबरन गाड़ी में बैठाकर जान से मारने की नियत से हमला करने का आरोप लगाया है। वहीं दूसरी ओर पुलिस ने पूरे मामले को प्रेम प्रसंग से जुड़ा बताते हुए अपहरण और मारपीट की बात से इनकार किया है। घटना के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं और मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

मिली जानकारी के अनुसार मोहम्मदपुर पचवारा खास टोला महुअवा निवासी मालती देवी पत्नी प्रेमचंद यादव ने पुलिस को दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया कि उनका पुत्र प्रदीप यादव शुक्रवार की सुबह करीब 10 बजे घर से जंगल कौड़ियां जाने की बात कहकर निकला था। काफी समय बीत जाने के बाद भी जब वह वापस घर नहीं लौटा तो परिवार के लोग परेशान हो गए। परिजनों ने उसके मोबाइल फोन पर कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन बंद मिला।

मालती देवी के अनुसार दोपहर लगभग 4:30 बजे उनके मोबाइल पर 9690395823 नंबर से फोन आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को चिलुआताल थाने का दारोगा बताया और कहा कि उनका पुत्र प्रदीप यादव थाने पर मौजूद है। फोन पर उन्हें तुरंत आने के लिए कहा गया। इसके बाद मालती देवी चिलुआताल थाना जाने के लिए घर से निकलीं, लेकिन करीब 40 से 45 मिनट बाद उसी नंबर से दोबारा कॉल आया और उन्हें जंगल कौड़ियां पुलिस चौकी पहुंचने के लिए कहा गया।

परिजनों का आरोप है कि जब वे जंगल कौड़ियां चौकी पहुंचे तो उन्होंने प्रदीप यादव को गंभीर रूप से घायल अवस्था में देखा। युवक के शरीर पर चोट के कई निशान थे और वह दर्द से कराह रहा था। मां के पूछने पर प्रदीप यादव ने बताया कि जब वह जंगल कौड़ियां से अपने घर लौट रहा था, तभी रास्ते में कुछ लोगों ने उसे जबरन एक अर्टिगा गाड़ी में बैठा लिया।

युवक ने आरोप लगाया कि धीरज यादव और नीरज यादव पुत्रगण चंद्रकेश यादव, मनोज यादव पुत्र रमेश यादव, चंद्रभान यादव पुत्र जियावन यादव निवासी मोहम्मदपुर पचवारा खास टोला महुअवा थाना पीपीगंज तथा आकाश यादव निवासी भिटहा थाना सहजनवा समेत तीन से चार अज्ञात लोगों ने उसे अगवा किया। आरोप है कि सभी लोग उसे कालेसर रोड के पास पुल के नीचे ले गए, जहां हॉकी, लोहे की रॉड और ईंट से उसकी जमकर पिटाई की गई।

प्रदीप यादव का कहना है कि आरोपियों ने उसे जान से मारने की नीयत से हमला किया। मारपीट के दौरान वह बेहोश हो गया था। बाद में जब उसे होश आया तो वह खुद को चिलुआताल थाने में पाया। युवक के अनुसार वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने बताया कि कुछ लोग उसे घायल अवस्था में थाने लेकर आए थे।

मालती देवी ने आरोप लगाया कि उनके पुत्र को पुरानी रंजिश के चलते निशाना बनाया गया है। उन्होंने कहा कि आरोपियों ने पहले से साजिश रचकर प्रदीप यादव का अपहरण किया और फिर उसकी बेरहमी से पिटाई की। परिजनों का कहना है कि युवक के पूरे शरीर पर गंभीर चोटों के निशान हैं और उसकी हालत खराब बनी हुई है। परिवार ने मामले में निष्पक्ष जांच और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

हालांकि पूरे मामले में पुलिस का पक्ष बिल्कुल अलग है। पीपीगंज थानाध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि इस प्रकार का कोई अपहरण या जानलेवा हमला नहीं हुआ है। उनके अनुसार मामला युवक और युवती से जुड़ा हुआ है। पुलिस के मुताबिक प्रदीप यादव एक युवती के साथ बस से देवरिया जा रहा था। इसी दौरान युवती के परिजनों ने दोनों को देख लिया और उन्हें थाने लेकर आए।

आगे उन्होंने बताया कि युवती की तहरीर के आधार पर पुलिस ने प्रदीप यादव के खिलाफ धारा 64 और 351(3) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद आरोपी युवक को जेल भेज दिया गया है।

पुलिस की सूचना और पीड़ित परिवार के आरोपों में भारी अंतर होने के कारण मामला और भी पेचीदा बन गया है। एक तरफ परिवार युवक के अपहरण और जानलेवा हमले की बात कह रहा है, तो वहीं पुलिस इसे प्रेम प्रसंग और युवती की शिकायत से जुड़ा मामला बता रही है।

घटना के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय लोग भी मामले को लेकर अलग-अलग राय व्यक्त कर रहे हैं। फिलहाल पूरे प्रकरण की सच्चाई पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आ सकेगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में कौन से तथ्य निकलकर सामने आते हैं और पुलिस आगे क्या कार्रवाई करती है।

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