उत्तर प्रदेश/ गोरखपुर, केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में समेकित जनकल्याण एवं जन जागरूकता अभियान के अंतर्गत सोमवार को “विकसित कृषि संकल्प अभियान 2026” एवं “खेत बचाओ अभियान” का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र, चौकमाफी गोरखपुर तथा कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ब्लॉक सरदार नगर के ग्राम बघाड़ एवं बिलारी में संपन्न हुआ। अभियान का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक एवं प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करना तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के महत्व को समझाना रहा।

कार्यक्रम में उपस्थित उद्यान वैज्ञानिक डॉ. अजीत कुमार श्रीवास्तव ने किसानों को जैव उर्वरकों के लाभों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जैव उर्वरकों के नियमित प्रयोग से फसलों की उत्पादकता में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है। उन्होंने कहा कि एजेटोबैक्टर, राइजोबियम कल्चर, ट्राइकोडर्मा पाउडर तथा ब्यूवेरिया वैसियाना जैसे जैव उर्वरकों का प्रयोग किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकता है।

डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि पीएसबी (फॉस्फेट सॉल्युबिलाइजिंग बैक्टीरिया) कल्चर से बीज उपचार करने पर मिट्टी में मौजूद अनुपलब्ध फास्फोरस पौधों के लिए उपलब्ध अवस्था में परिवर्तित हो जाता है। वहीं, राइजोबियम कल्चर के उपयोग से दलहनी फसलों की पैदावार में भी 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की जाती है।
इस अवसर पर मृदा वैज्ञानिक डॉ. संदीप प्रकाश उपाध्याय ने किसानों को मिट्टी की जांच के महत्व के बारे में जागरूक किया। उन्होंने कहा कि बिना मृदा परीक्षण कराए उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग मिट्टी के स्वास्थ्य को लगातार नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे मिट्टी की जांच के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करें, ताकि लागत कम हो और उत्पादन बेहतर हो सके।
डॉ. उपाध्याय ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति भी जागरूक किया। उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों को जलाने से खेतों में मौजूद लाभदायक सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है। इसके विपरीत यदि फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन किया जाए तो वे सड़कर उत्तम जैविक खाद में परिवर्तित हो जाते हैं, जो प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देते हैं।
कार्यक्रम में कृषि विभाग की ओर से सहायक विकास अधिकारी (कृषि) राजीव नंदन तथा सहायक विकास अधिकारी (कृषि रक्षा) अविनाश कुमार सिंह ने भी किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी।
इस जनजागरूकता अभियान में सरदार नगर क्षेत्र के 200 से अधिक कृषकों ने सहभागिता की और वैज्ञानिकों से खेती से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की। किसानों ने प्राकृतिक खेती, मृदा संरक्षण एवं जैव उर्वरकों के उपयोग को अपनाने का संकल्प भी लिया।
विकसित कृषि संकल्प अभियान 2026 किसानों को आत्मनिर्भर बनाने, कृषि लागत कम करने तथा पर्यावरण संरक्षण के साथ टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है।
