उत्तर प्रदेश/ केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर चलाए जा रहे समेकित जनकल्याण एवं जन जागरूकता अभियान के अंतर्गत महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र, चौकमाफी गोरखपुर एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में “विकसित कृषि संकल्प अभियान 2026” तथा “खेत बचाओ अभियान” का सफल आयोजन किया गया। अभियान के तहत दो विकास खंडों के चार गांवों में पहुंचकर किसानों को आधुनिक, वैज्ञानिक एवं प्राकृतिक खेती की तकनीकों की जानकारी दी गई।

यह कार्यक्रम 11 जून 2026 को खोराबार ब्लॉक के ग्राम रामपुर एवं पोछियां ब्रह्मस्थान तथा पाली ब्लॉक के ग्राम रामडीह तोरनी एवं भगवानपुर में आयोजित किया गया। अभियान में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर खेती को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाने से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मृदा वैज्ञानिक डॉ. संदीप प्रकाश उपाध्याय ने किसानों को मृदा परीक्षण, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, जैविक खेती एवं प्राकृतिक कृषि के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि मिट्टी की नियमित जांच से फसलों की वास्तविक पोषण आवश्यकता का पता चलता है, जिससे उर्वरकों का संतुलित उपयोग संभव हो पाता है। इससे उत्पादन लागत कम होने के साथ-साथ भूमि की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहती है।
डॉ. उपाध्याय ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देते हुए किसानों को जीवामृत एवं घन जीवामृत तैयार करने की विधि बताई। साथ ही फसलों को कीट एवं रोगों से सुरक्षित रखने के लिए नीमास्त्र और अग्नियास्त्र जैसे प्राकृतिक घोल तैयार करने की प्रक्रिया की भी जानकारी दी। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाने का आह्वान किया।
वहीं, शस्य विज्ञान वैज्ञानिक डॉ. अवनीश कुमार सिंह ने किसानों को धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) तकनीक के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह तकनीक पानी, श्रम एवं समय की बचत करने के साथ-साथ उत्पादन लागत को भी कम करती है। इसके अतिरिक्त उन्होंने इस तकनीक में प्रयोग किए जाने वाले खरपतवारनाशकों के वैज्ञानिक उपयोग के संबंध में भी किसानों को जागरूक किया।
खोराबार ब्लॉक में आयोजित कार्यक्रम में कृषि विभाग से सहायक विकास अधिकारी (कृषि) अनूप शुक्ला एवं सहायक विकास अधिकारी (कृषि रक्षा) उमेश तिवारी ने विभागीय योजनाओं और किसानों को उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी। वहीं, पाली ब्लॉक में पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. विवेक प्रताप सिंह तथा उद्यान वैज्ञानिक डॉ. अजीत कुमार श्रीवास्तव ने किसानों को पशुपालन और उद्यानिकी के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करने के उपाय बताए।
अभियान के दौरान उपस्थित विशेषज्ञों ने किसानों से वैज्ञानिक सलाह के अनुरूप खेती करने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की अपील की। कार्यक्रम में सैकड़ों किसानों की सहभागिता ने यह साबित किया कि खेती को आत्मनिर्भर और टिकाऊ बनाने की दिशा में किसान नई तकनीकों को अपनाने के लिए उत्सुक हैं।
