उत्तर प्रदेश/ गोरखपुर के पीपीगंज क्षेत्र में चर्चित दीनदयाल सिंह आत्महत्या प्रकरण ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में मृतक की पत्नी नीलम सिंह ने अपने पति की आत्महत्या के पीछे लंबे समय से चले आ रहे संपत्ति विवाद को मुख्य कारण बताया। उन्होंने काली सिंह और घनश्याम सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों ने सुनियोजित तरीके से उन्हें और उनके परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, जिसके चलते उनके पति ने आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठाया।

प्रेस वार्ता के दौरान नीलम सिंह ने कहा कि उनके पति दीनदयाल सिंह द्वारा छोड़े गए कथित सुसाइड नोट में भी काली सिंह द्वारा लगातार मानसिक उत्पीड़न और दबाव बनाए जाने का उल्लेख किया गया है। उनका दावा है कि लगातार हो रहे विवाद और प्रताड़ना से परेशान होकर ही उनके पति ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।

नीलम सिंह ने आरोप लगाया कि काली सिंह और घनश्याम सिंह ने दिव्या सिंह को मोहरा बनाकर उनके खिलाफ करीब 18 से 20 मुकदमे दर्ज करवाए। उनका कहना है कि इन मुकदमों के माध्यम से पूरे परिवार को लगातार कानूनी और मानसिक दबाव में रखा गया, जिससे परिवार की स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण हो गई थी।

अपनी वैवाहिक जीवन का जिक्र करते हुए नीलम सिंह ने बताया कि उनकी शादी वर्ष 2011 में पटना गुरुद्वारा में सिंधी रीति-रिवाज से दोनों परिवारों की सहमति से हुई थी। उन्होंने कहा कि शादी पूरी तरह सामाजिक और पारिवारिक स्वीकृति के साथ संपन्न हुई थी, लेकिन पति की मृत्यु के बाद अब उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पीपीगंज स्थित उनकी संपत्तियों पर अवैध कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। नीलम सिंह का कहना है कि घनश्याम सिंह सहित कुछ अन्य लोग उनकी संपत्ति हड़पने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन और पुलिस से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए तथा उनके परिवार को सुरक्षा और न्याय उपलब्ध कराया जाए।
वहीं, जब इस पूरे मामले में दूसरे पक्ष से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने नीलम सिंह द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और बेबुनियाद बताया। दूसरे पक्ष का कहना है कि इस पूरे विवाद के लिए स्वयं नीलम सिंह जिम्मेदार हैं और उन पर लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है।
फिलहाल इस प्रकरण में कई मामले कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। प्रशासन की ओर से निष्पक्ष जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
