उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर के विकासखंड जंगल कौड़िया अंतर्गत ग्राम पंचायत मैनाभागर में दलित बस्ती तक जाने वाला मार्ग बदहाल होने से ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से सड़क की मरम्मत या निर्माण नहीं कराया गया है, जिसके कारण बरसात के मौसम में पूरा रास्ता कीचड़ और जलभराव से भर जाता है। इससे बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और अन्य ग्रामीणों का आवागमन बेहद कठिन हो गया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार पूरे गांव में अधिकांश रास्तों का निर्माण हो चुका है, लेकिन दलित बस्ती तक जाने वाले मार्ग की अब तक अनदेखी की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यही रास्ता बस्ती के लोगों के लिए मुख्य संपर्क मार्ग है। इसी रास्ते से स्कूली बच्चे प्रतिदिन विद्यालय आते-जाते हैं, लेकिन बारिश के दौरान सड़क पर पानी भर जाने और कीचड़ फैल जाने से बच्चों को फिसलने का खतरा बना रहता है। कई बार ग्रामीणों को बच्चों को गोद में उठाकर सड़क पार करानी पड़ती है।

ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार ग्राम पंचायत और संबंधित अधिकारियों से सड़क निर्माण की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि हर वर्ष बरसात के समय यही समस्या सामने आती है, लेकिन जिम्मेदार विभाग केवल आश्वासन देकर अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट जाता है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत में सफाई कर्मी की नियुक्ति होने के बावजूद नियमित सफाई नहीं होती। नालियों की सफाई न होने के कारण बारिश का पानी रास्ते पर जमा हो जाता है, जिससे स्थिति और अधिक खराब हो जाती है। लोगों का कहना है कि यदि समय-समय पर सफाई कराई जाए तो जलभराव की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।
इसके अलावा ग्रामीणों ने पंचायत सचिव, लेखपाल और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि रोस्टर के अनुसार गांव में उपस्थित रहने की व्यवस्था होने के बावजूद संबंधित अधिकारी शायद ही कभी गांव का दौरा करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अधिकारी नियमित रूप से गांवों का निरीक्षण करें तो ऐसी मूलभूत समस्याओं का समय रहते समाधान संभव हो सकता है।
ग्रामीणों ने ब्लॉक प्रशासन पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि अधिकारी कार्यालयों तक ही सीमित रहते हैं और गांवों की वास्तविक स्थिति से अनभिज्ञ हैं। उनका कहना है कि जमीनी स्तर पर निरीक्षण की कमी के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और आम लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।
दलित बस्ती के निवासियों ने जिला प्रशासन, ग्राम पंचायत और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि मार्ग का तत्काल सर्वे कराकर पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए। साथ ही जल निकासी की समुचित व्यवस्था, नियमित सफाई और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए, ताकि बरसात के मौसम में लोगों को राहत मिल सके।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक जीवन से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण सुविधा है। यदि शीघ्र निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो बरसात के पूरे मौसम में हजारों लोगों को इसी बदहाल रास्ते से गुजरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। प्रशासन से अब ग्रामीणों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर विकास कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
