उत्तर प्रदेश/ गोरखपुर जनपद के विकास खंड भरोहिया की ग्राम पंचायत बिस्टौली उस समय देशभक्ति के रंग में रंग गई, जब भारतीय सेना में आर्मी इंजीनियर के रूप में वर्षों तक राष्ट्र की सेवा करने वाले आलोक प्रताप सिंह सेवानिवृत्ति के बाद अपने पैतृक गांव पहुंचे। गांव की सीमा से लेकर उनके आवास तक सैकड़ों मोटरसाइकिलों और चार पहिया वाहनों का भव्य काफिला निकाला गया। पूरे रास्ते भारत माता की जय, वंदे मातरम् और भारतीय सेना के जयघोष से वातावरण गूंज उठा। ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत कर उन्हें सम्मानित किया और देश की सेवा के प्रति अपना गर्व व्यक्त किया।
आलोक प्रताप सिंह के गृह प्रवेश को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। गांव के बुजुर्गों, युवाओं, महिलाओं और बच्चों सहित बड़ी संख्या में लोगों ने उनका अभिनंदन किया। और लोगों ने माल्यार्पण और पुष्पवर्षा कर उनका सम्मान किया। क्षेत्रवासियों का कहना था कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिकों का सम्मान समाज का नैतिक दायित्व है और आलोक प्रताप सिंह ने अपने कार्यकाल से पूरे क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया है।
स्वागत समारोह के दौरान आलोक प्रताप सिंह ने सभी शुभचिंतकों का हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्हें जो सम्मान मिला है, वह केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि भारतीय सेना के हर उस जवान का सम्मान है जो दिन-रात देश की सुरक्षा के लिए समर्पित रहता है। उन्होंने कहा कि सैनिक का जीवन त्याग, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक होता है तथा देश की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है।
मीडिया से बातचीत करते हुए आलोक प्रताप सिंह ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। लक्ष्य को पाने के लिए कठिन परिश्रम, अनुशासन, ईमानदारी और धैर्य सबसे आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को सोशल मीडिया और नकारात्मक गतिविधियों में समय गंवाने के बजाय अपनी ऊर्जा शिक्षा, कौशल विकास और देश निर्माण में लगानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति पूरे समर्पण के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़े तो सफलता निश्चित रूप से उसके कदम चूमती है।
अपने सैन्य जीवन के अनुभव साझा करते हुए आलोक प्रताप सिंह भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि जयपुर में नियमित सैन्य युद्धाभ्यास के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया था। अभ्यास के समय सैन्य वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया, जिसके नीचे वह और उनके दो साथी दब गए। इस दुर्घटना में तीनों जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। सेना के अस्पताल में उनका लंबे समय तक इलाज चला और सभी स्वस्थ भी हो गए, लेकिन चिकित्सकीय परीक्षण में उन्हें शारीरिक रूप से अनफिट घोषित कर दिया गया। इसी कारण उन्हें सेना से सेवानिवृत्त होना पड़ा।
उन्होंने कहा कि सेना से विदाई लेना उनके लिए भावुक क्षण था, लेकिन उन्हें इस बात का गर्व है कि उन्हें देश की सेवा करने का अवसर मिला। भारतीय सेना में बिताया गया हर पल उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि और अमूल्य धरोहर रहेगा।
आलोक प्रताप सिंह ने कहा कि सेना से रिटायर होने के बाद उनका जीवन थमने वाला नहीं है। अब वह आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करेंगे और यदि अवसर मिला तो किसी अन्य सरकारी सेवा के माध्यम से भी देश और समाज की सेवा करने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि जीवन में परिस्थितियां बदल सकती हैं, लेकिन देशसेवा का जज्बा कभी कम नहीं होना चाहिए।
आलोक प्रताप सिंह की घर वापसी और उनके सम्मान में निकाला गया भव्य स्वागत जुलूस पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों ने इसे भारतीय सैनिकों के प्रति सम्मान और राष्ट्रभक्ति की मिसाल बताया। वहीं युवाओं ने कहा कि आलोक प्रताप सिंह का संघर्ष, अनुशासन और सकारात्मक सोच उन्हें जीवन में आगे बढ़ने और देश के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की प्रेरणा देती है।
