गोरखपुर/ बापू इंटर कॉलेज के वरिष्ठ शिक्षक, गणित के महान विद्वान एवं अत्यंत सरल, सहज और विनम्र व्यक्तित्व के धनी चुनमुन सिंह के निधन की खबर सुनकर शिक्षा-जगत, विद्यार्थियों और उनके शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई। उनके निधन से हर कोई स्तब्ध है। शोक संवेदना व्यक्त करने और अंतिम दर्शन के लिए उनके घर पर लोगों का तांता लगा हुआ है। बड़ी संख्या में उनके शिष्य, सहकर्मी, परिचित और शुभचिंतक पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।
चुनमुन सिंह ने अपना पूरा जीवन शिक्षा, ज्ञानदान और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित कर दिया। उनके लिए अध्यापन महज नौकरी नहीं, बल्कि सेवा और पवित्र दायित्व था। उन्होंने कभी शिक्षा को कमाई का साधन नहीं बनाया। बिना किसी ट्यूशन की लालसा के उन्होंने निःस्वार्थ भाव से हजारों विद्यार्थियों को गणित जैसे कठिन विषय का ज्ञान दिया।
विद्यार्थियों का पाठ्यक्रम समय से पूरा हो सके, इसके लिए वह कॉलेज में अतिरिक्त कक्षाएं भी निःशुल्क पढ़ाते थे। बच्चों की शिक्षा के प्रति उनका समर्पण इतना गहरा था कि उन्होंने कभी सुविधाओं की कमी को अपने कर्तव्य के आड़े नहीं आने दिया। कई बार वह करीब 8 किलोमीटर तक पैदल चलकर भी विद्यार्थियों को गणित पढ़ाने पहुंचते थे। उनके लिए बच्चों की शिक्षा और उनका भविष्य व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं से कहीं अधिक महत्वपूर्ण था।
उनकी सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। बिना किसी दिखावे, तामझाम और स्वार्थ के उन्होंने अपना पूरा जीवन विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने में लगा दिया। यही कारण है कि उनके शिष्य आज भी उन्हें केवल शिक्षक नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत के रूप में याद करते हैं।
उनके निधन से बापू इंटर कॉलेज परिवार सहित शिक्षा जगत को बड़ी क्षति हुई है। उनके जीवन से शिक्षक कर्तव्यनिष्ठा, समर्पण और निःस्वार्थ सेवा की प्रेरणा ले सकते हैं, जबकि विद्यार्थी उनसे अनुशासन, परिश्रम, विनम्रता और ज्ञान के प्रति समर्पण सीख सकते हैं।
शोकाकुल शुभचिंतकों का कहना है कि चुनमुन सिंह भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा बांटा गया ज्ञान और उनके संस्कार अनगिनत विद्यार्थियों के जीवन में हमेशा जीवित रहेंगे। उनका व्यक्तित्व और शिक्षा के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
