गोरखपुर जनपद के पीपीगंज नगर क्षेत्र के कोल्हुआ गांव में घरेलू गैस सिलेंडर वितरण को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। गैस उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया है कि होम डिलीवरी के नाम पर गैस एजेंसियों के हाकर निर्धारित मूल्य से अधिक रुपये वसूल रहे हैं, वहीं सिलेंडरों से गैस निकालकर कम वजन वाले सिलेंडर उपभोक्ताओं को दिए जा रहे हैं। मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है और लोगों ने प्रशासन से तत्काल जांच कर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
गौरतलब है कि पीपीगंज स्थित आषीश इंडेन गैस सर्विस को लगभग तीन माह पूर्व गैस वितरण में अनियमितता पाए जाने के बाद प्रशासन द्वारा सील कर दिया गया था। इसके बाद एजेंसी से जुड़े लगभग 40 हजार गैस उपभोक्ताओं को छह अलग-अलग गैस एजेंसियों में स्थानांतरित किया गया। इनमें मनीराम इंडेन सर्विस, गायत्री इंडेन गैस सर्विस काजीपुर, जय शिव इंडेन गैस सर्विस चरगांवां, मां बामंत इंडेन गैस सर्विस बालापार, गोरखपुर इंडेन गैस सर्विस तथा कृपा इंडेन गैस सर्विस फरेन्दा महाराजगंज शामिल हैं।
वर्तमान में कोल्हुआ गांव में मुख्य रूप से मां बामंत इंडेन गैस सर्विस बालापार और गायत्री इंडेन गैस सर्विस काजीपुर के माध्यम से होम डिलीवरी की जा रही है। लेकिन उपभोक्ताओं का आरोप है कि वितरण प्रक्रिया पूरी तरह संदिग्ध और मनमानी तरीके से संचालित हो रही है।
गांव के उपभोक्ता राजेंद्र प्रसाद, दीपक कुमार, राजेश कुमार सिंह, दीपेश यादव, अभयनंदन समेत दर्जनों लोगों ने आरोप लगाया कि गैस सिलेंडर बुकिंग कराने और डीएसी नंबर प्राप्त होने के बावजूद उन्हें सही तरीके से गैस उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। उनका कहना है कि हाकर घरों के अंदर से सिलेंडर निकालकर देते हैं और कई बार सिलेंडर पहले से खुला हुआ होता है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि घर के अंदर ही अवैध रूप से रिफिलिंग कर प्रत्येक सिलेंडर से करीब दो किलो गैस निकाल ली जाती है, जिसके बाद कम गैस वाला सिलेंडर ग्राहकों को थमा दिया जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि घरेलू गैस सिलेंडर का निर्धारित मूल्य लगभग 975 रुपये है, लेकिन उपभोक्ताओं से 1000 से 1050 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। यदि कोई उपभोक्ता अतिरिक्त पैसे देने से मना करता है तो उसे गैस सिलेंडर देने में देरी की जाती है या फिर सिलेंडर उपलब्ध ही नहीं कराया जाता। कई उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि हाकर खुलेआम कहते हैं कि “ज्यादा पैसा दो तभी समय से गैस मिलेगी।”
मामले को और गंभीर बनाते हुए कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गैस सिलेंडरों की अवैध बिक्री भी की जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार प्रतिदिन कई सिलेंडर ऐसे लोगों को दिए जा रहे हैं जिनके पास डीएसी नंबर या वैध बुकिंग नहीं होती। आरोप है कि ऐसे लोगों से एक सिलेंडर के बदले 2500 से 3000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। जबकि वैध उपभोक्ताओं को नियमों का हवाला देकर परेशान किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो गैस वितरण में बड़े स्तर पर अनियमितता और कालाबाजारी का खुलासा हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गैस वितरण के दौरान सिलेंडरों की मौके पर वजन जांच कराई जाए और जिन हाकरों या एजेंसियों पर आरोप लग रहे हैं उनके रिकॉर्ड की भी जांच की जाए।
उपभोक्ताओं का यह भी कहना है कि होम डिलीवरी व्यवस्था का फायदा उठाकर कुछ लोग गरीब और ग्रामीण उपभोक्ताओं का आर्थिक शोषण कर रहे हैं। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो उपभोक्ता सामूहिक रूप से आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
इस मामले में जिला आपूर्ति अधिकारी गोरखपुर अरुण सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि यदि गैस एजेंसियों या उनके हाकरों द्वारा निर्धारित मूल्य से अधिक रुपये वसूले जा रहे हैं या कम गैस देकर उपभोक्ताओं को परेशान किया जा रहा है तो यह गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि शिकायत की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वहीं कैम्पियरगंज के आपूर्ति निरीक्षक संजीत कुमार ने भी कहा कि उपभोक्ताओं द्वारा लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच कराई जाएगी और यदि आरोप सही पाए गए तो संबंधित एजेंसी एवं हाकरों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
अब सवाल यह उठ रहा है कि पहले ही अनियमितताओं के चलते एक गैस एजेंसी पर कार्रवाई होने के बावजूद क्षेत्र में गैस वितरण व्यवस्था आखिर कैसे फिर से सवालों के घेरे में आ गई। उपभोक्ताओं की निगाहें अब प्रशासनिक जांच और कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
