गोरखपुर/ विश्व पर्यावरण दिवस एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ के जन्मदिवस के पावन अवसर पर महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र, गोरखपुर में पौधारोपण कार्यक्रम एवं “खेत बचाओ अभियान” का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना तथा भूमि, जल एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. आर. के. सिंह तथा प्रगतिशील कृषक लाला प्रसाद यादव द्वारा केंद्र में स्थापित समेकित कृषि प्रणाली परिसर में आम के पौधों का रोपण कर किया गया। इस अवसर पर उपस्थित किसानों एवं कर्मचारियों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व से अवगत कराया गया।

अपने संबोधन में डॉ. आर. के. सिंह ने कहा कि वर्ष 2026 के विश्व पर्यावरण दिवस की थीम “हमारी भूमि, हमारा भविष्य: भूमि पुनर्स्थापन, मरुस्थलीकरण और सूखा लचीलापन” है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा होना चाहिए। यदि हम धरती को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो ऊर्जा संरक्षण, जल बचत, वृक्षारोपण और कचरा प्रबंधन जैसे छोटे-छोटे प्रयासों को अपनी आदत बनाना होगा।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भूमि क्षरण, मरुस्थलीकरण और सूखे जैसी चुनौतियां कृषि एवं पर्यावरण दोनों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए भूमि पुनर्स्थापन और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के दौरान केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डॉ. संदीप प्रकाश उपाध्याय ने किसानों को “खेत बचाओ अभियान” के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखने, जैविक पदार्थों के उपयोग को बढ़ावा देने तथा संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने से खेतों की उर्वरता को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
कार्यक्रम का संचालन उद्यान वैज्ञानिक डॉ. अजीत कुमार श्रीवास्तव ने किया। इस दौरान उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों एवं किसानों ने सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करने, जल संरक्षण करने, ऊर्जा की बचत करने तथा अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने की शपथ ली।
इस अवसर पर केंद्र के गौरव, जितेंद्र सिंह एवं अतुल यादव सहित दो दर्जन से अधिक प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाने का संकल्प लिया।
विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने में सफल रहा, बल्कि किसानों को भूमि संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति भी प्रेरित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बना।
