बापू इंटर कॉलेज पीपीगंज में अवैध वसूली और छात्रों के उत्पीड़न के आरोप, समाजसेवियों ने जांच की मांग उठाई

उत्तर प्रदेश/ गोरखपुर जनपद के नगर पंचायत पीपीगंज में स्थित बापू इंटर कॉलेज, पीपीगंज में कार्यरत एक परिचारिका से कथित रूप से सुविधा शुल्क के नाम पर अवैध मासिक वसूली तथा छात्रों के उत्पीड़न को लेकर अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। इस संबंध में प्रबंध समिति एवं जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) गोरखपुर को अलग-अलग शिकायत पत्र भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है।

प्राप्त शिकायत पत्रों के अनुसार, विद्यालय में कार्यरत परिचारिका नर्वदा देवी के संबंध में आरोप लगाया गया है कि उन्हें विद्यालय में नियमित उपस्थिति से छूट देने के बदले प्रतिमाह लगभग 20 हजार रुपये की अवैध वसूली की जा रही है। शिकायतकर्ता का दावा है कि परिचारिका विद्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं होती हैं और केवल दस से पंद्रह दिन के अंतराल पर आकर हस्ताक्षर करती हैं अथवा उपस्थिति रजिस्टर उनके निवास स्थान तक पहुंचाया जाता है। इसके बावजूद उन्हें नियमित वेतन का भुगतान किया जा रहा है।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि यह व्यवस्था लगभग पिछले दो वर्षों से चल रही है और इसमें विद्यालय प्रशासन तथा प्रबंधन की कथित मिलीभगत है। उन्होंने यह भी कहा है कि बिना कार्य किए वेतन भुगतान किए जाने का मामला शिक्षा विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है।

गोरखपुर निवासी पंकज यादव ने जिला विद्यालय निरीक्षक को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया है कि परिचारिका की वास्तविक उपस्थिति की पुष्टि विद्यालय परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज से की जा सकती है। उन्होंने मांग की है कि विद्यालय के उपस्थिति रजिस्टर, वेतन भुगतान अभिलेख और सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। पंकज यादव ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो अभिभावक विरोध प्रदर्शन और धरना देने को बाध्य होंगे।

शिकायत पत्र की प्रतिलिपि संयुक्त शिक्षा निदेशक, सप्तम मंडल गोरखपुर तथा विद्यालय प्रबंधन को भी प्रेषित की गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला होगा बल्कि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।

जब इस संबंध में बापू इंटर कालेज पीपीगंज गोरखपुर के प्रधानाचार्य डॉ वी के यादव से बात हुई तो उन्होंने इस संबंध में कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया। उनका कहना है कि जब डीआईओएस कार्यालय से हमसे जवाब मांगा जाएगा तो मैं डीआईओएस कार्यालय को जवाब दे दूंगा।

वही इस संबंध में कार्यवाहक डीआईओएस अजीत सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में है और यह एक गंभीर मामला है। इसके लिए टीम गठित करके जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

अब देखना यह होगा कि जिला विद्यालय निरीक्षक एवं संबंधित शिक्षा अधिकारी शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और आरोपों की जांच कर क्या निष्कर्ष सामने लाते हैं। अभिभावकों और स्थानीय लोगों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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