उत्तर प्रदेश/ गोरखपुर जनपद के पीपीगंज थाना क्षेत्र के मेंहदरियां स्थित एक निजी गैस गोदाम का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। वीडियो में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के बीच गैस ट्रांसफर किए जाने का दावा किया जा रहा है। मामला सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही गैस गोदामों की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

शुक्रवार शाम वायरल हुए लगभग एक मिनट के वीडियो में एक युवक पाइप के माध्यम से दो गैस सिलेंडरों को जोड़कर एक सिलेंडर से दूसरे सिलेंडर में गैस भरता दिखाई दे रहा है। वीडियो में सुरक्षा मानकों और आवश्यक उपकरणों का अभाव भी स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार एलपीजी गैस की इस प्रकार की रिफिलिंग अत्यंत खतरनाक प्रक्रिया मानी जाती है, जिसमें थोड़ी सी लापरवाही भी आग लगने, गैस रिसाव या बड़े विस्फोट का कारण बन सकती है।
वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि यदि जांच में वीडियो की सत्यता प्रमाणित होती है तो यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों की जान-माल को भी गंभीर खतरे में डालने वाला मामला है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से गैस गोदामों की नियमित जांच और सुरक्षा मानकों की समीक्षा की मांग की है।
जानकारों के मुताबिक घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की अवैध रिफिलिंग एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है। घरेलू गैस पर सरकार द्वारा सब्सिडी और नियंत्रित वितरण व्यवस्था लागू की जाती है। ऐसे में एक सिलेंडर से दूसरे सिलेंडर में गैस ट्रांसफर करना, घरेलू गैस का व्यावसायिक उपयोग करना अथवा बिना अनुमति गैस का भंडारण करना कानूनन दंडनीय माना जाता है।
एलपीजी से जुड़े प्रमुख अपराधों में घरेलू सिलेंडरों की अवैध रिफिलिंग, व्यावसायिक उपयोग के लिए घरेलू गैस का इस्तेमाल, बिना लाइसेंस गैस भंडारण, छोटे सिलेंडरों में गैस भरना तथा सुरक्षा मानकों का उल्लंघन शामिल हैं। आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 एवं एलपीजी नियंत्रण आदेश-2000 के तहत दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। गंभीर मामलों में सजा और आर्थिक दंड दोनों का प्रावधान है। यदि किसी अधिकृत एजेंसी की संलिप्तता पाई जाती है तो उसका लाइसेंस या पंजीकरण भी निरस्त किया जा सकता है।
अग्निशमन विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि एलपीजी अत्यधिक ज्वलनशील गैस है। अवैध रिफिलिंग के दौरान गैस रिसाव होने पर मामूली चिंगारी भी भीषण दुर्घटना का कारण बन सकती है। देश के विभिन्न हिस्सों में पूर्व में ऐसी घटनाओं में कई लोगों की जान जा चुकी है और करोड़ों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है।
हालांकि वायरल वीडियो की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि वीडियो कब और किन परिस्थितियों में बनाया गया। प्रशासनिक और संबंधित विभागीय जांच के बाद ही यह तय हो सकेगा कि वीडियो में दिखाई गई गतिविधि वास्तव में अवैध गैस रिफिलिंग से जुड़ी है या नहीं।
इस संबंध में जब जिला पूर्ति अधिकारी गोरखपुर रामेंद्र सिंह से बात हुई तो उन्होंने बताया कि मामला संज्ञान में है संबंधित कंपनी के अधिकारियों को सूचना दे दी गई है संबंधित कंपनी के अधिकारियों के अधिकारियों के साथ वीडियो में दिखाई देने वाले गैस एजेंसी पर गहनता से जांच की जाएगी। यदि गैस एजेंसी गैस सिलेंडर की रीफिलिंग की पुष्टि होती है तो गैस एजेंसी पर आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के आदेश सन् 2000 के तहत विधिक कार्यवाही की जाएगी।
वही जब मनीराम गैस एजेंसी के मालिक राजेश गौतम से बात करने की कोशिश की गई उनका नंबर फॉरवार्डेड बता रहा था जिस कारण से इस संबंध में बात नहीं हो पाई।
फिलहाल पूरे मामले पर लोगों की नजर प्रशासनिक जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हुई है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि नियमों की अनदेखी हो रही है तो समय रहते कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोका जा सके। वायरल वीडियो ने एक बार फिर गैस गोदामों और एलपीजी वितरण केंद्रों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं और सुरक्षा मानकों के सख्ती से पालन की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
